हौसलों की उड़ान क्या कहिये!
छोटा सा आसमान क्या कहिये !!
दर्द से कौन अजनबी है यहाँ!
दर्द की दास्तान क्या कहिये।
उनके आने का आज चरचा है।
और मेरा मकान क्या कहिये!
बेच डाले चमन के गुल-बूटे;
वाह रे बाग़बान क्या कहिये!
जिंदगी के कठिन सफर में नदीम,
हर क़दम इम्तिहान, क्या कहिये!
Saturday, September 27, 2008
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उनके आने का आज चर्चा है।
ReplyDeleteऔर मेरा मकान क्या कहिये!
बेच डाले चमन के गुल-बूटे;
वाह रे बाग़बान क्या कहिये!
bahut khoobsurat
उनके आने का आज चर्चा है।
ReplyDeleteऔर मेरा मकान क्या कहिये!
वाह वाह अमर भाई ! मज़ा आगया !
आपकी सोंच आपकी कहन अच्छी लगी
ReplyDeleteगजल की क्लास चल रही है आप भी शिरकत कीजिये www.subeerin.blogspot.com
वीनस केसरी
उनके आने का आज चर्चा है।
ReplyDeleteऔर मेरा मकान क्या कहिये!
बहुत खुब क्या खुब लिखते है आप!!
वाह साहब वाह
ReplyDeleteबढ़िया अभिव्यक्ति
एक दम से सही कहा आप ने...
ReplyDeleteजिंदगी के कठिन सफर में नदीम,
हर क़दम इम्तिहान, क्या कहिये!
धन्यवाद
बहुत खूब!
ReplyDeleteहर शेर काबिले तारीफ है।
दर्द से कौन अजनबी है यहाँ!
ReplyDeleteदर्द की दास्तान क्या कहिये।
Suchmuch dard se kaun anjan hai yaha....
Aur dard ko kahe ho kahe to kahe kaise aur kisase kahe...
Achchha laga Amar bhai....
http://dev-poetry.blogspot.com/